८३म सगर राति दीप जरय नन्द विलास रायक संयोजकत्व मे भपटियाहीमे ३० अगस्त संध्या ६ बजे सँ ३१ अगस्त भोर ६ बजे धरि आयोजित अछि। ई आयोजन नारी केन्द्रित लघु आ विहनि कथापर आयोजित अछि। अहाँ सादर आमंत्रित छी।
Sunday, August 24, 2014
८३म सगर राति दीप जरय नन्द विलास रायक संयोजकत्व मे भपटियाहीमे ३० अगस्त संध्या ६ बजे सँ ३१ अगस्त भोर ६ बजे धरि आयोजित अछि। ई आयोजन नारी केन्द्रित लघु आ विहनि कथापर आयोजित अछि। अहाँ सादर आमंत्रित छी।
८३म सगर राति दीप जरय नन्द विलास रायक संयोजकत्व मे भपटियाहीमे ३० अगस्त संध्या ६ बजे सँ ३१ अगस्त भोर ६ बजे धरि आयोजित अछि। ई आयोजन नारी केन्द्रित लघु आ विहनि कथापर आयोजित अछि। अहाँ सादर आमंत्रित छी।
Saturday, August 23, 2014
विदेह भाषा सम्मान (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो- तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद)
विदेह भाषा सम्मान
(समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान)
२०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह)
२०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास)
२०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह)
२०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो- तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद)
(समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान)
२०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह)
२०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास)
२०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह)
२०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो- तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद)
Saturday, May 24, 2014
Thursday, April 17, 2014
81म सगर रातिक गोष्ठीमे अध्यक्षीय भाषण...
देवघरक कथा गोष्ठीमे अध्यक्षीय वक्तव्यमे कहल गेल-
:: जगदीश प्रसाद मण्डल
उदय-प्रलय शाश्वत सत् जहिना छै तहिना जिनगीओ आ जिनगीक किरिया-कलाप सेहो छै। मैथिली साहित्याकाशमे बीसम शताब्दीक आठम दशक ओहने ऊर्जावान साहित्यकारक टोली छल जेहेन वर्षातक पछाति ओस-पाला, गर्दा-धूरासँ स्वच्छ वायुमंडलक संग अकास रहैए। एक संग हरिमोहन बाबू (हरिमोहन झा), तंतर बाबू (तंत्रनाथ झा), मधुपजी (काशीकान्त मिश्र ‘मधूप’), किरणजी (काञ्चीनाथ किरण), मणिपद्मजी (ब्रज किशोर वर्मा ‘मणिपद्म’), शेखरजी (शुधांशु शेखर चौधरी), योगाबाबू (योगानन्द झा), राघवाचार्यजी, (बोध नारायण झा), बहेड़जी (राधाकृष्ण झा ‘बहेड़’) आ राधाकृष्ण चौधरीजी सन मैथिली साहित्यकाशमे दुनियाँक सभ दिशा देखिनिहार छला। दार्शनिक रहितो हरिमोहन बाबूकेँ मैथिली साहित्य हास्यसँ आगू नै बढ़ए देलकनि! एकैसम शदीक मांग अछि जे हुनक समीक्षा मिथिलाक चिन्तनधारा, अध्यात्म दर्शनक कसौटीपर हुअए। तहिना राधाकृष्ण जीक इतिहासक मूल तत्वक सेहो। चौधरी जीक इतिहास समाजमे पाठकक बीच एक नव सोच आ नव दृष्टि दैत अछि तँए ओइ दृष्टिसँ हुनका देखल जाए। भऽ सकैए किछु पोथी हाथ नै पड़ल होन्हि, मुदा इतिहासो तँ इतिहासे छी। जे अखनि तक रज-रजवारासँ आगू नै बढ़ल अछि, तैठाम इतिहासक पूर्णता देखब उचित नै। दुर्भाग्य रहल अछि जे अखनि धरिक इतिहास सामाजिक ताना-बानाकेँ नीक जकाँ नै ताकि सकल अछि। अखनो मिथिलाक खान-पान आ घर-दुआर अपन आदिम स्वरूपकेँ बँचौने अछि। मात्र देखैक नजरिक जरूरत अछि। जे मधुपजी पोरो सागकेँ देखि सकै छथि ओ साग खेनिहारकेँ नै देखि पबितथि? रहस्यमय अछि। किरणजी तँ सहजे मैथिलीक किरणे छला। कठही पैडिलक साइकिलपर शतरंजी चौपेतले रहै छेलनि। शरदक चान जकाँ चमकैत सोभाव। मात्र चाहपर अभ्यागती! बीचमे एकटा प्रश्न उठैए, ओहेन टोली आइ किए ने? साहित्यजगतमे जागरण छल, समाजक बीच जिज्ञासा छल जे कि साहित्य हमरो छी। किरण जीक स्पष्ट कहब छेलनि, जहिना बजै छी तहिना लिखू, जहिना समाजकेँ देखै छिऐ तेहने विषय बनाउ, वएह भेल साहित्य। जेहने विचार किरण जीक रहनि तेहने विचार राहुल सांकृत्यायन जीक सेहो रहनि। हुनको कहब छन्हि अपन बात आन आ आनक बात अपने नीक जकाँ बूझि जाइ, वएह भेल ओइ भाषाक व्याकरण। भाषाक धाराक अंग भेल शब्द। भाषाक धारा ओइसँ वृहत अछि। आन भाषा केना आन भाषामे प्रवेश करैए ओ अलग प्रक्रिया भेल। मणिपद्मजी, सचमुच साहित्यक मर्म बूझिनिहार मणिपद्म भेला। ओना अपनो जिनगीक अनुभव आ दरभंगा जिलाक पुबरिया हिस्साक अखनो कि गति अछि ओइ अनुकूल हुनक सृजन छन्हि। बेछप साहित्यकार। एकभग्गू कविए मात्र नै छला, लोकगाथाक मर्म बुझिनिहारो छला। आठम दशक उर्वर होइक कारण यएह सभ छला। जहिना आठम दशकक उर्वरता छल तहिना नअम दशक उसराह बनैत गेल, बनियेँ गेल। मुदा तैयो साहित्यक धार बहिते रहल अछि। एकटा बात आरो, आठम दशक ओहेन रहल, जइमे गाम-गाममे हराएल-भुतिआएल किछु साहित्यकार सेहो भेटला। मुदा अखनो बहुत हराएल छथि। किछु हेराएलो गेला।
सगर राति दीप जरए, कथा गोष्ठीक आयोजनक अवधारणाक जनम किरण जीक जयन्तीक अवसरिपर लोहना (धर्मपुर)मे एकत्रित साहित्यकारक बीच भेल। मुदा साकार भेल प्रभास कुमार चौधरी जीक माध्यमसँ। एकटा बात बीचमे, किरणजी सन खोद-बेद केनिहारक अवसरि दोसर प्रभासजीक स्थापना। बेछप जिनगी, बेछप सोच, बेछप सृजन, बेछप नजरि प्रभास जीक। असीम जिज्ञासाक संवेदना रग-रगमे रमल छेलनि। जेकर परिचए जीवंत रचना अखनो दाइए रहल छन्हि। साहित्यकारक बीच सहमत बनल जे जहिना पंजाबी सहित्यमे ‘दीवा जले सारी रात’ कथा गोष्ठी भरि रातिक होइए, तहिना मैथिलीओमे हुअए। नव उत्साह नव जिज्ञासाक संग प्रभास भाय डेग उठौलनि। मनमे छेलनि जे साहित्यिक धारा समाजक संग चलए। मुदा किछुए साल पछाति मरि गेला।
पहिल कथा गोष्ठीक आयोजन मुजफ्फरपुरमे भेल। ओतए प्रभासजी नोकरी करै छला। रेणु जीक अध्यक्षतामे गोष्ठी भेल। रेणुजी सेहो समाजकेँ निष्पक्ष ढंगसँ देखै छला। तइ दिनसँ अखनि धरिक कथा गोष्ठी मैथिली साहित्यक धरोहर पूजी छी। एक तँ कथा गोष्ठी दोसर साहित्यक मुख्य विधा। तँए पहिल संतोनो कहल जा सकैए।
पहिल कथा गोष्ठी जनवरी १९९० इस्वीमे भेल। पहिल गोष्ठीमे कथापाठ केने रहथि, रमेशजी- “थाक”, श्रीनिवासजी (शिव शंकर श्रीनिवास)- “वसातमे बहैत लोक”, विभूति आनन्दजी- “अन्यपुरुष”, अशोक जी- “पिशाच”, सियाराम सरस जी- “ओहि साँझक नाम”, प्रभासजी- “खूनी”, रविन्द्र चौधरीजी सेहो कथा पाठ केलनि। तैबीच डा. नन्द किशोर जे एल.एस. कौलेजक नीक शिक्षक, हिन्दीमे कथा पाठ केलनि। मुदा दुर्भाग्य ईहो जे ओ मैथिलीभाषी रहितो हिन्दीमे पाठ केलनि। समीक्षको छथि। कथाक समीक्षक रूपमे कथाकरक संग रमानन्द झा ‘रमण’जी, भीम भाय (भीमनाथ झा), मोहन भारद्वाजजी, जीवकान्त, कथा पाठ जीवकान्त केलनि आकि नै से जनतबमे नै अछि। इत्यादि समीक्षकक संग किछु दर्शको रहबे करथि।
तेसर कथागोष्ठीसँ पोथीक लोकार्पण शुरू भेल, जे बढ़ैत-बढ़ैत दरभंगा गोष्ठी शीर्षपर पहुँच गेल। एक संग पौंतीस-चालिसटा पोथीक लोकार्पण। निर्मली कथा गोष्ठीसँ पूर्व धरि शीर्षपर रहल। निर्मली गोष्ठीमे पैंतालिस-पचासटा पोथीक लोकार्पण भेल। कथा गोष्ठीसँ कथाधारामे एक गति आएल, नव-नव रचनाकारक प्रवेश गोष्ठीमे होइत रहल, गोष्ठी आगू बढ़ैत रहल। मुदा गोष्ठीक बीच एकरूपता नै रहल, केतौ एहेन आयोजन भेल जे साँझसँ भोर भेलो पछाति कथाकारक कथा रहि जाइ छन्हि तँ केतौ अधरतियेमे बेवस्थापक चाह-पान समेटि लइ छथि, खैर जे भेल। साहित्य गोष्ठी साहित्यकारक मंच छी। जइ मंचपर सभकेँ अपन विचार रखैक हक छन्हि। जखनि सभ कियो मिथिलाक विकास चाहै छी तखनि मत-मतान्तर किए? कथा गोष्ठीक संग कथा-विचार मंचोक तँ जरूरति अछिए। लिखैक मानदण्ड, समीक्षाक मानदण्ड के बनौत? समयानुकूल दृष्टिए तँ समसामयिके ने जिम्मा भेल। समसामयिक रचनाकारक रचनाकेँ स्तरानुसार सिलेबसमे स्थान आवश्यक अछि।
दुनियाँमे पैघ-पैघ शिक्षण संस्थान जनसहयोगसँ चलि रहल अछि, की अपना ऐठाम नै चलि सकैए? एकटा विश्वविद्यालय अछि, रेडियो स्टेशन अछि, ओ केना नीक जकाँ बढ़ि सकए, सबहक जिम्मा भेल। एकटा विश्वविद्यालय अछि, जे सोलहन्नी सरकार दिस तकैए, तहूमे लूटिक बाढ़ि छइहे, तइसँ केते आशा कएल जा सकैए। मिथिलामे पाइबला शिक्षण प्रेमी नै छथि, सेहो बात नै अछि। गजेन्द्र जीक (गजेन्द्र ठाकुर) सम्पादनमे नागेन्द्र जीक (नागेन्द्र झा, श्रुति प्रकाशन) सहयोगसँ केते पोथी प्रकाशित भेल अछि ओ अपने-आपमे एकटा उदाहरण अछि। ओना बेक्तीगत रूपमे गजेन्द्रजीकेँ केना बिसरल जाए जे टैगोर पुरस्कारमे एँड़ी-चोटी एक केने छथि। कोंचिन जाइकाल पटना एयरपोर्टपर अपन गाड़ीसँ पहुँचा सभ किछु देखा-सुना दुर्गानन्द मण्डलक संग विदा केलनि। स्पष्ट सोच छन्हि जे आर्थिक दृष्टिए कमजोर रचनाकार लोकनिक रचना प्रकाशित करब। से करबो केलनि आ करितो छथि।
जगदीश प्रसाद मण्डल
सम्पर्क-
गाम- बेरमा, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (मिथिला)
साहित्यिक कृति-
उपन्यास : (१) मौलाइल गाछक फूल (२००९), (२) उत्थान-पतन (२००९), (३) जिनगीक जीत (२००९), (४) जीवन-मरण (पहिल संस्करण २०१० आ दोसर २०१३), (५) जीवन संघर्ष (पहिल संस्करण २०१० आ दोसर २०१३), (६) नै धाड़ैए (२०१३) प्रकाशित। (७) बड़की बहिन (२०१३), प्रकाशित। (८) सधबा-विधवा, तथा (९) भादवक आठ अन्हार (शीघ्र प्रकाश्य)
नाटक : (१) मिथिलाक बेटी (२००९), (२) कम्प्रोमाइज (२०१३), (३) झमेलिया बिआह (२०१३), (४) रत्नाकर डकैत (२०१३), (५) स्वयंवर (२०१३) प्रकाशित।
लघु कथा संग्रह : (१) गामक जिनगी (२००९), (२) अर्द्धांगिनी (२०१३), (३) सतभैंया पोखरि (२०१३), (४) उलबा चाउर (२०१३), (५) भकमोड़ (२०१३) प्रकाशित। पतझार (शीघ्र प्रकाश्य)
विहनि कथा संग्रह : (१) बजन्ता–बुझन्ता (२०१३), (२) तरेगन (बाल-प्रेरक विहनि कथा संग्रह) (२०१० पहिल संस्करण, २०१३ दोसर संस्करण)
एकांकी संग्रह : (१) पंचवटी (२०१३) प्रकाशित।
दीर्घ कथा संग्रह : (१) शंभुदास (२०१३) प्रकाशित।
कविता संग्रह : (१) इंद्रधनुषी अकास (२०१३), (२) राति-दिन (२०१३), (३) सतबेध (२०१३) प्रकाशित।
गीत संग्रह : (१) गीतांजलि (२०१३), (२) तीन जेठ एगारहम माघ (२०१३), (३) सरिता (२०१३), (४) सुखाएल पोखरिक जाइठ (२०१३) प्रकाशित।
Wednesday, April 9, 2014
MAITHILI-ENGLISH/ ENGLISH-MAITHILI DICTIONARIES
गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा
MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES
जीनियोलोजिकल मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध
गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा
जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध
जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध (Click this link to download)
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